Mitra_Madhur

जो भी लिखता हूँ, जब भी लिखता हूँ अपने और अपनों के दिलों को सुकून देने के लिए लिखता हूँ...

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आदत...

Posted On: 28 Mar, 2013 में

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Sir jhukaane ki aadat nahi hai,
Aansoo bahaane ki aadat nahi hai,
Hum kho gaye to pachhtaaoge bahut,
Hamaari Laut ke Aane ki aadat nahi hai,
Tere dar pe Muhabbat ke sawali ban jaate,
Lekin Haath phailaane ki aadat nahi hai,
Teri yaaden aziz to mujhe hai bahut,
Magar Waqt ganwaane ki aadat nahi hai,
Tum sakht Dil nikle kya gila karen hum,
Shikwa-e-Dil lab pe laane ki aadat nahi hai,
Bad’dua bhi kya karen HAQ men tumhaare?
Hame to Dil bhi dukhaane ki aadat nahi hai…
- – - – - – - – - – - – - – - – - – - – - – - – (COPY)
सर झुकाने की आदत नहीं है
आंसू बहाने की आदत नहीं है
हम खो गए तो पछताओगे बहुत
हमारी लौट के आने की आदत नहीं है
तेरे दर पे मुहब्बत के सवाली बन जाते
लेकिन हाथ फैलाने की आदत नहीं है
तेरी यादें अज़ीज़ तो मुझे है बहुत
मगर वक्त गंवाने की आदत नहीं है
तुम सख्त दिल निकले क्या गिला करें हम
शिकवा-ए-दिल लैब पे लाने की आदत नहीं है
बद’दुआ भी क्या करें हक में तुम्हारे ?
हमें तो दिल भी दुखाने की आदत नहीं है…
®नीलकमल वैष्णव”अनिश”

Sir jhukaane ki aadat nahi hai,

Aansoo bahaane ki aadat nahi hai,


Hum kho gaye to pachhtaaoge bahut,

Hamaari Laut ke Aane ki aadat nahi hai,


Tere dar pe Muhabbat ke sawali ban jaate,

Lekin Haath phailaane ki aadat nahi hai,


Teri yaaden aziz to mujhe hai bahut,

Magar Waqt ganwaane ki aadat nahi hai,


Tum sakht Dil nikle kya gila karen hum,

Shikwa-e-Dil lab pe laane ki aadat nahi hai,


Bad’dua bhi kya karen HAQ men tumhaare?

Hame to Dil bhi dukhaane ki aadat nahi hai…

- – - – - – - – - – - – - – - – - – - – - – - – (COPY)

सर झुकाने की आदत नहीं है

आंसू बहाने की आदत नहीं है


हम खो गए तो पछताओगे बहुत

हमारी लौट के आने की आदत नहीं है


तेरे दर पे मुहब्बत के सवाली बन जाते

लेकिन हाथ फैलाने की आदत नहीं है


तेरी यादें अज़ीज़ तो मुझे है बहुत

मगर वक्त गंवाने की आदत नहीं है


तुम सख्त दिल निकले क्या गिला करें हम

शिकवा-ए-दिल लैब पे लाने की आदत नहीं है


बद’दुआ भी क्या करें हक में तुम्हारे ?

हमें तो दिल भी दुखाने की आदत नहीं है…

®नीलकमल वैष्णव”अनिश”



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 30, 2013

हम खो गए तो पछताओगे बहुत हमारी लौट के आने की आदत नहीं है तेरे दर पे मुहब्बत के सवाली बन जाते लेकिन हाथ फैलाने की आदत नहीं है तेरी यादें अज़ीज़ तो मुझे है बहुत मगर वक्त गंवाने की आदत नहीं हमें बढ़िया रचना छोड़ने के आदत नहीं है ! सुन्दर


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